Narmada Natural Farms

Narmada Natural Farms Welcome to Narmada Natural Farms, where we are committed to nurturing nature and cultivating a sustainable future!

We practice and promote 100% natural farming methods that prioritize soil health, biodiversity, and chemical-free produce.

13/08/2026

अमरूद में फल गिरने का एक कारण जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन भी हो सकता है।

कई बार हम सोचते हैं कि ज्यादा खाद देंगे तो पौधा ज्यादा अच्छा बढ़ेगा और ज्यादा फल देगा। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। नाइट्रोजन ज्यादा होने पर पौधे की बढ़वार तो बहुत अच्छी हो सकती है, लेकिन फल टिकने पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है।

इसलिए खाद हमेशा जरूरत के हिसाब से और संतुलित मात्रा में देनी चाहिए।

प्राकृतिक खेती में हमारा ध्यान सिर्फ एक पोषक तत्व देने पर नहीं रहता। हम मिट्टी पर काम करते हैं, ताकि पौधे को सभी जरूरी पोषक तत्व संतुलित रूप से मिलते रहें।

12/08/2026

अमरूद में फल ड्रॉप होना देखकर अक्सर किसान परेशान हो जाते हैं। लेकिन हर फल का गिरना किसी कमी या बीमारी की वजह से नहीं होता।

कई बार पौधा अपनी क्षमता से ज्यादा फल बना लेता है। इसके बाद पौधा खुद तय करता है कि वह कितने फलों को पर्याप्त पोषण दे सकता है। जो फल उसकी क्षमता के हिसाब से नहीं टिक पाते, उनमें से कुछ गिर जाते हैं।

इसे पौधे की एक प्राकृतिक प्रक्रिया की तरह समझना चाहिए। असली बात यह है कि फल ड्रॉप कितना हो रहा है और उसके पीछे कारण क्या है।

11/08/2026

Farming is a way of life!

इन दिनों Soil Food Web पढ़ते-पढ़ते एक बहुत अच्छी बात समझ में आई।हम अक्सर कहते हैं कि हमारे खेत की मिट्टी भारी है, हल्की ...
10/08/2026

इन दिनों Soil Food Web पढ़ते-पढ़ते एक बहुत अच्छी बात समझ में आई।

हम अक्सर कहते हैं कि हमारे खेत की मिट्टी भारी है, हल्की है या दोमट है। यह उसकी Texture (टेक्सचर) है, जो रेत, गाद और चिकनी मिट्टी के अनुपात से तय होती है। इसे हम आसानी से बदल नहीं सकते।

लेकिन एक और चीज़ है, जिसे Structure (स्ट्रक्चर) कहते हैं।

स्ट्रक्चर का मतलब है कि मिट्टी के छोटे-छोटे कण आपस में कैसे जुड़े हुए हैं। यही तय करता है कि मिट्टी में हवा कितनी जाएगी, पानी कितनी आसानी से अंदर जाएगा और जड़ें कितनी आसानी से बढ़ेंगी।

अच्छी बात यह है कि स्ट्रक्चर सुधारा जा सकता है।

जब मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है, फफूंद सक्रिय होती हैं, केंचुए काम करते हैं और सूक्ष्मजीव लगातार अपना काम करते हैं, तब मिट्टी के कण आपस में जुड़कर एक बेहतर संरचना बनाते हैं।

यानी हर समस्या का समाधान ट्रैक्टर या रोटावेटर नहीं है। कई बार मिट्टी को सुधारने का सबसे अच्छा तरीका उसके भीतर के जीवों को काम करने देना होता है।

Soil Food Web पढ़ते-पढ़ते एक बात और स्पष्ट हो रही है—अच्छी खेती की शुरुआत केवल अच्छी मिट्टी से नहीं, बल्कि अच्छी मिट्टी की संरचना से होती है।

09/08/2026

अमरूद के बाग में नीचे उग रही अलग-अलग घास और खरपतवार मिट्टी को ढककर रखती हैं। इससे मिट्टी खुली नहीं रहती और धीरे-धीरे यही वनस्पति मिट्टी के लिए जैविक पदार्थ का स्रोत बनती है।

हाँ, जब खरपतवार बहुत ज्यादा बढ़ जाए या बाग में काम करने में परेशानी होने लगे, तो हम ब्रश कटर से इसे वहीं काट देते हैं। काटी हुई घास वहीं जमीन पर गिरती है और धीरे-धीरे मल्च की तरह काम करती है।

यानी खेत से कुछ बाहर नहीं गया। जो खेत में उगा, वही वापस खेत की मिट्टी में चला गया।

यही प्राकृतिक खेती में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल है।

06/08/2026

Just another day!

05/08/2026

पिछले साल भी हमने यही देखा था, और इस साल भी वही बात सामने आ रही है। कुछ पौधों में समय पर भरपूर कलियाँ आ जाती हैं, जबकि कुछ पौधे कुछ दिन बाद फ्लावरिंग शुरू करते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि दूसरा पौधा खराब है। हर पौधे की अपनी स्थिति होती है। पिछले सीजन में उसने कितना उत्पादन दिया, उसे भरपूर धूप मिली या नहीं, उसकी प्रूनिंग कब हुई और आज उसकी बढ़वार कैसी है—ये सभी बातें तय करती हैं कि उस पर कलियाँ कब आएँगी।

इसलिए अगर आपके बाग के सभी पौधों पर एक साथ फ्लावरिंग नहीं हुई है, तो घबराइए मत। पहले पौधे को समझिए, फिर कोई निर्णय लीजिए।

खेती में धैर्य भी उतना ही ज़रूरी है, जितना सही प्रबंधन। कई बार जो पौधा आज पीछे दिख रहा होता है, वही कुछ दिनों बाद कलियों से भर जाता है।

04/08/2026

दो पौधे… एक ही बाग… लेकिन कलियों में इतना अंतर क्यों?

फर्क सिर्फ प्रूनिंग का है।

जिस पौधे के बीच का हिस्सा खुला है और नीचे तने तक धूप पहुँच रही है, उस पर भरपूर कलियाँ हैं। वहीं जो पौधा बहुत घना है, उसके अंदर धूप नहीं पहुँच पा रही। ऐसे पौधों में फ्लावरिंग अक्सर कम देखने को मिलती है।

इसलिए प्रूनिंग करते समय सिर्फ शाखाएँ मत काटिए। कोशिश कीजिए कि पेड़ का बीच खुला रहे और धूप नीचे तक पहुँचे। कई बार यही छोटी-सी बात फ्लावरिंग में बड़ा फर्क पैदा कर देती है।

अपने बाग में एक बार ध्यान से देखिए… धूप कहाँ तक पहुँच रही है? कई सवालों का जवाब वहीं मिल जाएगा।

03/08/2026

अमरूद में फूल हमेशा नई शाखा पर ही आते हैं। लेकिन अगर शाखा अभी भी तेजी से बढ़ रही है, तो पौधा पहले उसकी बढ़वार पूरी करता है। इस समय उसकी ऊर्जा नई पत्तियाँ और नई लंबाई बनाने में लगती है।

जैसे ही शाखा की बढ़वार धीमी पड़ती है, उसी पर कलियाँ निकलनी शुरू हो जाती हैं।

इसलिए हर नई शाखा पर तुरंत फूल आने की उम्मीद मत रखिए। पहले शाखा को परिपक्व होने दीजिए। सही समय आने पर वही शाखा सबसे अच्छी फ्लावरिंग देती है।

अगर आपके बाग में भी नई शाखाएँ तो बहुत हैं, लेकिन कलियाँ कम हैं, तो इसका कारण यही भी हो सकता है।

इन दिनों Soil Food Web पढ़ते समय एक दिलचस्प जीव के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिला—प्रोटोजोआ (Protozoa)।ये इतने छ...
02/08/2026

इन दिनों Soil Food Web पढ़ते समय एक दिलचस्प जीव के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिला—प्रोटोजोआ (Protozoa)।

ये इतने छोटे होते हैं कि इन्हें नंगी आँखों से देख पाना संभव नहीं है। लेकिन मिट्टी के भीतर इनका काम बहुत बड़ा है।

प्रोटोजोआ मुख्य रूप से बैक्टीरिया को खाते हैं। पहली नज़र में लगता है कि इससे तो बैक्टीरिया कम हो जाएँगे और नुकसान होगा।

लेकिन प्रकृति का संतुलन कुछ अलग ही तरीके से काम करता है।

जब प्रोटोजोआ बैक्टीरिया को खाते हैं, तब बैक्टीरिया के भीतर मौजूद अतिरिक्त नाइट्रोजन और दूसरे पोषक तत्व मिट्टी में वापस छोड़ देते हैं। यही पोषक तत्व पौधों की जड़ों के लिए उपलब्ध हो जाते हैं।

यानी प्रोटोजोआ केवल बैक्टीरिया की संख्या नियंत्रित नहीं करते, बल्कि पोषक तत्वों को पौधों तक पहुँचाने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसलिए स्वस्थ मिट्टी का मतलब केवल अधिक सूक्ष्मजीव होना नहीं है। ज़रूरी यह भी है कि उन सूक्ष्मजीवों के बीच प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

Soil Food Web पढ़ते-पढ़ते बार-बार महसूस हो रहा है कि मिट्टी के सबसे छोटे जीव भी खेत की उर्वरता बनाए रखने में उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने हमें दिखाई देने वाले बड़े जीव।

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