26/07/2026
Sonam Wangchuk
एक सैनिक जब सरहद पर खड़ा होता है, तब वह न अपनी भूख की चिंता करता है, न प्यास की, न मौसम की, न अपने परिवार की। उसके लिए सबसे पहले उसका राष्ट्र और उसके देशवासी होते हैं।
लेकिन जब वही सैनिक अपने देश लौटता है और उसे "दलाल", "चोर" या अन्य अपमानजनक शब्द सुनने पड़ते हैं, तो यह केवल उस सैनिक का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के सम्मान का अपमान है।
यदि किसी स्तर पर कोई राजनीतिक भूल हुई है, तो उसका दोष उस सैनिक पर नहीं थोपा जाना चाहिए। सैनिक केवल अपने कर्तव्य का पालन करता है। वह आदेशों का पालन करते हुए अपने प्राणों की बाज़ी लगाता है ताकि देश सुरक्षित रह सके।
आइए, मतभेद चाहे किसी से भी हों, लेकिन अपने सैनिकों के सम्मान से कभी समझौता न करें। क्योंकि वे ही हैं जो अपने घर-परिवार, सुख-सुविधाएँ और कभी-कभी अपना जीवन भी त्यागकर हमारे सुरक्षित भविष्य की रक्षा करते हैं।
जय हिन्द। वन्दे मातरम्।